अनुभाग 7

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व्याख्यान के बाद भी संगीत कक्ष कुछ देर तक भरा रहा, जैसे कोई कमरा भरा रहता है, wenn etwas gesagt wurde, das sich in den Köpfen noch nicht gelegt hat. कुछ मेहमान उठे, खिड़कियों की ओर गए, जैसे उन्हें हवा लेनी हो; दूसरे बैठे रहे और अपने गिलासों को देखते रहे, जैसे गिलास अचानक नैतिक हो गए हों. ग्रैंड पियानो वहाँ खड़ा था, बिना बजाए, और इसमें कुछ स्पर्श करने वाला था, कि वह, इस सारी ऑप्टिमierung के बीच, अब भी सिर्फ एक वाद्य था, कोई माप‑यंत्र नहीं.

Hans Castorp भी उठ खड़ा हुआ. उसे महसूस हुआ कि उसकी टाँगें, बैठने के बाद, एक छोटा‑सा विरोध दर्ज करा रही थीं – और कैसे तुरंत, बिल्कुल अपने आप, उसके भीतर यह वाक्य ऊपर आया: बैठना नया धूम्रपान है. ऐसी सूत्रों की यही ताकत है: वे अनुभूति का उपनिवेश कर लेते हैं.

वह निकास की ओर गया, जल्दी में नहीं, बल्कि उस धीमी शिष्टता के साथ, जो उसने युद्ध में भी नहीं खोई थी. वह गया, और जाते‑जाते उसकी नज़र – और कैसे यह और तरह हो सकती थी – एक आकृति पर पड़ी, जिसे वह जानता था, बिना सचमुच जाने.

Philipp Morgenstern मेज़ों में से एक पर बैठा था, थोड़ा किनारे, और उसके बगल में उसकी पत्नी बैठी थी. उसका सिर थोड़ा झुका हुआ था, जैसे वह अब भी सुन रहा हो, हालाँकि व्याख्यान को बहुत देर हो चुकी थी. उसकी पत्नी के हाथ में पानी का गिलास था; वह थकी हुई लग रही थी, पर नाखुश नहीं. ऐसा था, जैसे यहाँ ऊपर थकान को एक एक्सेसरी की तरह पहनना सीख लिया गया हो.

Morgenstern ने Hans को देखा, उठा – फिर वही हरकत, जो अब पहले से ही नैतिक हो चुकी थी – और उसके पास आया.

„Herr Castorp“, उसने कहा, और उसका लहजा दोस्ताना, लेकिन सावधान था, जैसे उसे डर हो, कि किसी गलत लहजे से वह पूरी एक गतिशीलता शुरू कर देगा. शायद यह उसमें सबसे अहम बदलाव था: उसने लहजों को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया था.

„था…“ – वह ऐसा शब्द ढूँढ रहा था, जो बहुत भावुक न लगे – „था दिलचस्प, है न?“

Hans Castorp मुस्कुराया, वह शिष्ट, हल्की‑सी दूरी वाली मुस्कान, जो उसकी अपनी थी.

„हाँ“, उसने कहा. „दिलचस्प. और अप्रसन्नकारी.“

Morgenstern हल्का‑सा हँसा, लेकिन व्यंग्य से नहीं; बल्कि राहत के साथ, कि यहाँ ऊपर भी थोड़ी‑सी विडंबना की इजाज़त थी.

„मैं कोशिश करता हूँ“, उसने धीमे से कहा, और Hans ने महसूस किया कि वह पोषण के बारे में नहीं, बल्कि सबके बारे में बोल रहा था, „चीजों को… सही करने की.“

उसने अपनी पत्नी की ओर एक नज़र डाली, और यह नज़र – ऐसा कहना ही होगा – सम्मानजनक थी. कोई स्वामित्व नहीं, कोई निर्णय नहीं, बस एक तरह की मौन सहमति: मैं तुम्हें देखता हूँ.

Hans Castorp ने उन पाँच संकल्पों के बारे में सोचा, जिन्हें Morgenstern ने कभी जल‑दुनिया में उसे सुनाए थे, जैसे वे वर्तमान का कोई कैटेकिज़्म हों: सम्मान, करुणा, ज़िम्मेदारी, सुरक्षा, साझेदारी. और उसने सोचा, कि ऐसे संकल्प कितनी आसानी से ऑप्टिमierung में बदल सकते हैं, कितनी आसानी से देखभाल से नियंत्रण बन सकता है.

„सही“, उसने धीरे से कहा, „एक खतरनाक शब्द है.“

Morgenstern ने सिर हिलाया, जैसे उसने यही उम्मीद की हो.

„मुझे पता है“, उसने कहा. „लेकिन…“ – वह तिरछा मुस्कुराया – „अगर तुम सच में कुछ चाहते हो, तो तुम कोई रास्ता ढूँढ लेते हो, नहीं तो कोई बहाना.“

यह Zieser के उद्धरणों में से एक था, और यह Morgenstern के मुँह में अचानक अब किसी फिटनेस‑स्टिकर जैसा नहीं, बल्कि एक ऐसे आत्म‑आह्वान जैसा लगा, जो दर्द देता है.

Hans Castorp ने उसे देखा, और एक पल के लिए उसने सहानुभूति महसूस की; इंसान बने रहने की कोशिश के साथ सहानुभूति, बिना उस गधे में बदले, जो दावा करता है कि घास नीली है.

„आपका सचमुच नाम Morgenstern है?“ Hans ने लगभग अनायास पूछा.

Morgenstern ने मुँह बनाया, जैसे यह सवाल उसे एक साथ शर्मनाक और अहम लगे.

„मैं…“ उसने कहा. „मैंने तय किया है, कि मैं सुबह…“ – वह रुक गया, क्योंकि यह बहुत बचकाना लग रहा था – „कि मैं सुबह अलग होना चाहता हूँ. पिछली शाम वाला नहीं. वह गधा नहीं. समझते हैं आप?“

Hans Castorp बहुत अच्छी तरह समझता था. क्योंकि वह खुद भी ऐसा इंसान था, जो सुबह शाम से अलग होना चाहता था, बस उसका अलग होना नैतिक नहीं, बल्कि अस्तित्वगत था: नाम की जगह उपनाम, दर्ज होने की जगह अदृश्यता.

„हाँ“, उसने कहा. „मैं समझता हूँ.“

Morgenstern ने उसे आभारी नज़र से देखा, जैसे यहाँ ऊपर समझदारी कोई दुर्लभ संसाधन हो.

फिर उसकी पत्नी उनके पास आई, Morgenstern के बगल में खड़ी हो गई, और Morgenstern ने, बिल्कुल अनजाने‑से, एक छोटा‑सा क़दम बगल की ओर रखा, ताकि वह उसके पीछे नहीं, बल्कि उसके साथ‑साथ खड़ी हो. यह सूक्ष्म‑इशारे के रूप में साझेदारी थी. और Hans Castorp, जो अनुभूति‑मनुष्य था, ने इसे एक छोटे‑से भीतरी चुभन के साथ दर्ज किया: इंसान बदल सकता है, बड़ी‑बड़ी बातों से नहीं, बल्कि छोटी‑छोटी हरकतों से.

„शुभ रात्रि“, Morgenstern ने कहा.

„शुभ रात्रि“, Hans Castorp ने कहा.

वह चला गया.

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