अनुभाग 11

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Hans Castorp को नहीं पता था, वह कब सो गया था.

यही है, आदरणीय पाठिका, आदरणीय पाठक, एकमात्र sicherer Hinweis इस बात पर, कि आदमी सोया है: कि उसने Übergang को नहीं mitbekommen किया है. जैसे ही आदमी उसे bemerkt करता है, वह अब कोई Übergang नहीं रहता, बल्कि eine Leistung बन जाता है.

वह जागा, जब बाहर अभी अँधेरा था, और वह एक पल चुपचाप लेटा रहा, अपने भीतर सुनता रहा, कमरे पर सुनता रहा, राजमार्ग पर सुनता रहा. वह मौजूद था, हाँ – लेकिन और दूर. या वह उससे और दूर था.

उसने करवट बदली, देखा कि Handapparat अब भी उल्टा पड़ा था, और इस पर उसे एक छोटी, बालसुलभ संतुष्टि महसूस हुई: उसने मशीन की, कुछ घंटों के लिए, नज़र हटा दी थी.

फिर वह फिर से सो गया.

सुबह उसने, लगभग अपने‑आप, Gerät की ओर हाथ बढ़ाया. नहीं, इसलिए नहीं कि वह ज़रूर जानना चाहता था, कि वह कैसे सोया था – वह यह नहीं जानना चाहता था –, बल्कि इसलिए कि Wissen अब उसकी अस्तित्व‑रूप बन गया था.

Auswertung प्रकट हुई.

वह मित्रतापूर्ण थी.

उसने कहा:

Einschlaflatenz: 21 Minuten.

Wachzeiten: 1, zusammen 12 Minuten.

REM: 19 %.

Stressindikatoren: verbessert.

Hans Castorp संख्याओं को घूरता रहा.

वह अपने‑आप को किसी नए इंसान जैसा महसूस नहीं कर रहा था. वह अपने‑आप को ज़्यादा तरोताज़ा भी नहीं महसूस कर रहा था. वह अपने‑आप को… सामान्य महसूस कर रहा था. और सामान्यता, किसी Programm में, एक चमत्कार जैसी लगती है.

उसने Handapparat को एक तरफ रख दिया, छत की ओर देखा और सोचा, बहुत धीरे, बहुत साफ़:

क्या मैंने सचमुच बेहतर नींद ली है?

या मैं बस… अलग तरह से लेटा था?

उसने Fakir‑Matte के बारे में सोचा. उसने सोचा, वह कितनी शांति से लेटा रहा था, क्योंकि हर हरकत नुकीली हो जाती. उसने सोचा कि Ring Bewegung मापता है. और उसने सोचा – और यही वह Mann’sche Pointe थी, जो अपने‑आप लिख गई –, कि मशीन ने शायद यह पहचाना ही नहीं था, कि वह जाग रहा था, क्योंकि वह, Spitzen के डर से, ज़रा भी नहीं झटका था.

वह मुस्कुराया. यह एक विनम्र मुस्कान थी.

और थोड़ी‑सी अप्रसन्न करने वाली.

क्योंकि ऐसा ही है, आदरणीय पाठिका, आदरणीय पाठक, हमारी आधुनिक Kur में: अंत में आदमी यह नहीं जानता, कि वह बेहतर जी रहा है – या बस बेहतर प्रोटोकॉल किया जा रहा है.

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