Hans Castorp ने हाथ को जेब से बाहर निकाला और बिना चाहे लकड़ी की छोटी छड़ी को दो उंगलियों के बीच पकड़े रखा. उसकी हाथ में वह एक खिलौने जैसी लग रही थी, जैसे कोई Beweismittel, जैसे कुछ, जो man einem Kind geben würde, damit es beschäftigt ist.
डॉक्टर ने उस पर नज़र डाली.
„आह“, उसने धीरे से कहा. „आपके पास तो कुछ है.“
Hans Castorp ने कुछ नहीं कहा.
„क्या यह आपका Stift है?“ डॉक्टर ने पूछा.
Hans Castorp ने कानों में एक गर्मी महसूस की.
„यह मुझे दिया गया है“, उसने अंत में कहा.
„और आप किससे लिखते हैं?“ डॉक्टर ने पूछा. „किससे आप अपने आप को लिखते हैं?“
Hans Castorp ने उसकी ओर देखा, और उसी Augenblick में उसे ऐसा लगा, मानो Schildchen के अक्षरों – AuDHS – में एक दूसरा प्रश्न छिपा हो, जो ausgesprochen नहीं wird: आप कौन हैं?
„सबसे“, Hans Castorp ने कहा, और यह ऐसा लगा, मानो वह एक वाक्य दोहरा रहा हो, जो किसी दूसरी Stimme ने उसे उपहार में दिया हो. „जब कोई इसके धुंधला हो जाने के लिए तैयार हो.“
डॉक्टर ने धीरे-धीरे सिर हिलाया, मानो Hans Castorp ने कुछ सही कहा हो, हालांकि वह तो केवल एक Bild था.