शाम को लैगून के ऊपर आसमान उस तरह के लाल रंग का था, जो मैत्रीपूर्ण नहीं होता.
यह, आदरणीय पाठिका, आदरणीय पाठक, एक फर्क है उस लाल रंग के बीच, जो सजाता है, और उस लाल रंग के बीच, जो चेतावनी देता है. यह लाल कोई आभूषण नहीं था.
Hans Castorp अपने कमरे में बैठा था.
उसने दिन को, जितना वह कर सका, अनुष्ठानों में कसा था: चाय, गोलियाँ, कदम – वह ऐसा था, मानो उसे डर हो कि अगर वह नहीं गिनेगा, तो सब बिखर जाएगा.
अंगूठी ने उसे शाम को एक छोटी-सी सूचना दी थी:
गतिविधि: लक्ष्य प्राप्त.
Hans Castorp ने संख्या पर नज़र डाली.
उसने दस हज़ार से ज़्यादा कदम चले थे.
उसने सोचा: मैं समुद्र तट पर रहा हूँ, मैं गलियों से गुज़रा हूँ, मैं Gustav के पीछे-पीछे चला हूँ.
दस हज़ार कदम, आदरणीय पाठिका, आदरणीय पाठक, कभी-कभी किसी खाई के चारों ओर एक वृत्ताकार गति के अलावा कुछ नहीं होते.
वह उठा, खिड़की की ओर गया.
बाहर का पानी गहरा था.
और फिर भी: एक जगह, जहाँ आसमान की रोशनी भीतर गिर रही थी, वह लाल चमक रहा था.
Hans Castorp ने सुबह के बारे में सोचा, नल से निकली गुलाबी किरण के बारे में. उसने गुड़हल के बारे में सोचा. उसने किनारे पर लाल धारियों के बारे में सोचा.
उसने सोचा: पानी लाल हो गया है, क्योंकि कोई बहुत देर तक ठहरता है.
खटखटाहट हुई.
Hans Castorp मुड़ा.
एक आवाज़ – न Kautsonik, न ऊँचे पठार की वह सूखी धूप; यहाँ सब कुछ नरम, अजनबी था – बोली:
„Signore Castorp?“
Hans Castorp ने दरवाज़ा खोला.
एक आदमी वहाँ खड़ा था, वर्दी में, विनम्र, उस तरह की विनम्र जड़ता के साथ, जो उन लोगों में मिलती है, जिन्हें बुरी ख़बरें इस तरह देनी होती हैं कि वे परेशान न करें.
„Signore Gustav…“ उसने कहा.
Hans Castorp ने महसूस किया कि उसका दिल उसकी छाती में धड़क उठा.
„हाँ?“ उसने कहा.
आदमी ने खाँसी साफ की.
„Er ist… unwell“, उसने कहा, और महसूस होता था कि उसने यह शब्द इसलिए खोजा था, ताकि कुछ न कहना पड़े. „Doctor… coming.“
Hans Castorp ने सिर हिलाया.
„मैं आता हूँ“, उसने कहा.
वह चला.
गलियारा शांत था. कालीनों ने कदमों को निगल लिया. कीटाणुनाशक की गंध और तेज़ थी.
Gustav के दरवाज़े के सामने दो लोग खड़े थे: एक आदमी, एक औरत, दोनों चिकित्सा पोशाक में, जो इतनी तटस्थ थी कि होटल जैसी लगती थी. एक डॉक्टर, एक देखभालकर्मी – या कोई सेवा, जो ऐसा दिखावा करती है, मानो वह चिकित्सा हो.
Hans Castorp अंदर आया.
Gustav बिस्तर पर लेटा था.
वह छोटा लग रहा था.
यह, आदरणीय पाठिका, आदरणीय पाठक, सबसे क्रूर अनुभूतियों में से एक है: हर इंसान, रचने वाला भी, वह भी, जो वाक्यों से दुनिया को थामे रखता है, बिस्तर में फिर से बच्चा बन जाता है.
Gustav ने Hans की ओर देखा.
वह मुस्कुराया नहीं.
„आप आए हैं“, उसने कहा.
Hans Castorp ने सिर हिलाया.
„हाँ“, उसने कहा. „मैं ठहरा रहा.“
Gustav ने आँखें बंद कर लीं.
„बिलकुल“, उसने धीरे से कहा. „यही आपकी प्रतिभा है.“
डॉक्टरनी – या जो भी वह थी – „Gastroenteritis“ के बारे में बोल रही थी, „Flüssigkeit“ के बारे में, „Beobachtung“ के बारे में. वह उस लहजे में बोल रही थी, जो एक साथ शांत भी करता है और अधिकारहीन भी.
Gustav सुन रहा था, जैसे वह संगीत सुन रहा हो.
Hans Castorp को सिर्फ „पानी“ शब्द सुनाई दिया.
„क्या उसने…?“ Hans ने शुरू किया.
औरत ने मुश्किल से दिखाई देने लायक सिर हिलाया.
„पानी“, उसने एक बार फिर कहा. „हम सलाह देते हैं…“
सिफ़ारिश.
Hans Castorp हँस सकता था.
इस पल में वह, अगर वह बुरा होता, कह सकता था: जीवन एक सिफ़ारिश है, और मृत्यु उसका अमल.
वह बुरा नहीं था. वह सिर्फ थका हुआ था.
Gustav ने आँखें खोलीं.
„जाइए“, उसने अचानक कहा.
Hans Castorp ने उसे घूरा.
„नहीं“, उसने कहा.
Gustav ने हल्की-सी मुस्कान दी.
„आप ज़िद्दी हैं“, उसने कहा.
Hans Castorp चुप रहा.
Gustav ने उस तरफ देखा, जहाँ उसकी नोटबुक पड़ी थी – नाइटस्टैंड पर, जैसे कोई दिल, जिसे उतार कर रख दिया गया हो.
„मुझे वह दीजिए“, उसने कहा.
Hans Castorp ने नोटबुक उठाई, उसे थमाई.
Gustav ने उसे ऐसे थामा, जैसे वह कुछ गर्म पकड़े हो.
फिर उसने, बिना Hans की ओर देखे, कहा:
„अगर मैं…“ वह रुक गया. „अगर मैं अब और नहीं…“
Hans Castorp ने महसूस किया कि उसका गला तंग हो गया.
„फिर?“ उसने पूछा.
Gustav ने कहा:
„आप लिखिए.“
Hans Castorp ने उसे घूरा.
„मैं?“ उसने कहा.
Gustav ने सिर हिलाया.
„आप लिख सकते हैं“, उसने कहा. „आप बस ऐसा दिखावा करते हैं, मानो आप नहीं लिख सकते.“
Hans Castorp ने निगला.
„मैं मान लिखता हूँ“, उसने कहा.
Gustav हँसा – एक छोटा, सूखा, थका हुआ-सा स्वर.
„मान“, उसने कहा. „आप वाक्य लिखिए.“
Hans Castorp ने नोटबुक की ओर देखा.
उसने वे पन्ने देखे, जिन्हें Gustav ने भरा था.
उसने एक ईर्ष्या महसूस की, जो साथ ही प्रशंसा भी थी.
„क्यों?“ उसने पूछा, और यह बचकाना लगा.
Gustav ने आँखें बंद कर लीं.
„क्योंकि किसी को ठहरना होगा“, उसने कहा. „होटल में नहीं. वाक्य में.“
Hans Castorp चुप रहा.
वह बैठ गया.
वह ठहरा रहा.